ख्वाहिश.....

Saturday, February 14, 2009 · 2 comments


*~*~*~*~*~*जानवर*~*~*~*~*~*~*
काश मैं तेरे हसीन हाथों का कँगन होता,
तु बड़े चाव से.....बड़े मन के साथ,
अपनी नाजुक सी कलाई में चढ़ाती मुझको,
और बेताबी से फुरसत के लम्हों में,
तु किसी सोच में डूबकर जो घुमाती मुझको,
मैं तेरे हाथ की "खुशबू" से महक-सा जाता,
जब कभी मुड़ में आकर चुमा करती मुझको,
तेरे होठों कि हिद्त से ढक-सा जाता,
रात को जब भी तु नींद के सफर पर जाती,
मैं तेरे हाथ का एक तकिया बन जाता,
*~*~*~*~*तेरे नाम*~*~*~*~*---यहीं तो है।

यार को मैंने.....

Thursday, February 5, 2009 · 1 comments

***************जानवर***************
कुछ दिन पहले मुहब्बत को मुहब्बत समझा हमने,
मुहब्बत हुई, मुहब्बत को अपना समझा हमने.
मुहब्बत में इस कदर मदहोश हो गये,
इस कि बेवफाई को वफा समझा हमने.
जख्म इस कदर मुहब्बत ने दिये,
इन जख्मों को फुल समझा हमने.
मुहब्बत कि चीख-ओ-पुकार इस कदर थी,
आस-पास के लोगों के रोने को हसनां समझा हमने.
मुहब्बत कि शिद्दत में आंखें इस कदर चौंधिया गये,
हर चमकती हुई चीज को सोना समझा हमने.
दीवाना इस कदर मुहब्बत ने बनाया हमको,
अपनों को बैगाना और "उनको" अपना समझा हमने.
मुहब्बत कि यादें दिल पर कुछ युं नक्श कर गई,
भुलने कि कोशिश में खुद को ही भुला दिया हमने.
**********तेरे नाम*************यही तो है.

वो तेरा नाम था.....

Monday, February 2, 2009 ·

***********जानवर************
वो कुछ सुनता तो मैं कहती,
मुझे कुछ और कहना था.
वो पल भर को जो रुक जाता,
मुझे कुछ और कहना था.
कहा उस ने सुनी मेरी, सुनी भी अनसुनी कर दी,
उसे मालुम था इतना,
मुझे कुछ और कहना था.
गलतफहमी ने बातों को युहीं बदल डाला वरना?
कहा कुछ ओर था, वो कुछ ओर समझा.
मुझे कुछ और कहना था.
********तेरे नाम********यही तो है

बरसात........

Saturday, January 31, 2009 · 1 comments

****************जानवर**************
गर्मी .... ओर पसीने से घबरा कर सोच रहा हूँ
की
अपने रब से बारिश की दुआ मांगु...
मगर ....
ये सोच कर खौफजदा सा.......हो जाता हूँ,
कि ..........
गर्मी की शिद्दत सहना बेहतर है.....
कहीं........
ऐसा ना हो कि बारिश बरसे......
.....ओर मेरी कच्ची बस्ती ही गिर जायेयेयेयेयेयेये?????????
**************तेरे नाम****************यही तो है

तेरे नाम……

Friday, January 30, 2009 · 0 comments

***********जानवर************
पत्थर बना दिया मुझे रोने नहीं दिया,
दामन भी तेरे गम ने भिगोने नहीं दिया.
तन्हाईयाँ तुम्हारा पता पुछती रही,
रात भर तुम्हारी याद ने सोने नहीं दिया.
आंखों में आकर बैठ गयी आंसुओं की लहर,
पलकों पर कोई ख्वाब, पर रोने नहीं दिया.
दिल को तुम्हारे नाम के आंसू अजीज थे,
दुनियाँ का दर्द दिल में समाने नहीं दिया.
"काका" युहीं उसकी याद चली हाथ थाम कर,
मेले में इस जहां के खोने नहीं दिया..
********तेरे नाम********यही तो है