ये सोचना की मैं.......

Wednesday, May 13, 2009 · 1 comments

*~*~*~*~*~*~*~*~जानवर*~*~*~*~*~*~*~*~*~*
कहीं चांद रातों में खो गया, कहीं चांदनी भी भटक गई,
मैं चराग, वो भी बुझा हुआ, मेरी रात कैसे चमक गई?
मेरी दास्तान को आरजु थी, तेरी नरम पलकों की छांव में,

मेरे साथ था तुझे जागना, तेरी आँख कैसे झपक गई?
भला हम मिले भी तो क्या मिले! वही दुरियाँ, वही फासले,
ना कभी हमारे कदम बढ़े, ना कभी तुम्हारी झिझक गई.
तेरे हाथ से मेरे होंठों तक वही इंतजार की प्यास है,
मेरे नाम की जो शराब थी, कहीं रास्ते में छलक गई.
तुझे भुल जाने की कोशिशें कभी कामयाब ना हो सकी,
तेरी याद शाख-ए-गुलाब है जो हवा चली तो लचक गई.
*~*~*~*~*~*~*~*~तेरे नाम*~*~*~*~*~*~*~*~ यही तो है

कैसे भी हो.....

Tuesday, May 12, 2009 · 2 comments

*~*~*~*~*~*जानवर~*~*~*~*~*
बहारों में पतझड़ के साये है,
नजारों पर अन्धेरे से छाये है,
फुलों के दामन में कांटे है,
बागों में फैले सन्नाटे है,
कोयल की कूक अनजानी है,
हंसी की आँखों में पानी है,
खुशनुमा झोंकों में महक नहीं,
आसमां में पंछियों की चहक नहीं,
ख्यालों की कोई जंजीरे नहीं,
ख्वाबों सी कोई तकदीरें नही,
दिल की धड़कनों में सिर्फ़ आहें है,
गलत मन्जिलों पर जाती हुई राहें है,
नाकामयाब सी कई कोशिशे है,
भोलेपन में छुपी साजिशे है,
हम इस छल भरी दुनियाँ में,
जाये तो जाये कहाँ???????
*~*~*~*तेरे नाम*~*~*~*~*यही तो
है

कभी तो........

Monday, April 27, 2009 · 1 comments



*~*~*~*~*~जानवर~*~*~*~*~*
रात में ख्यालों में आती हो तुम,
कभी सामने आकर भी देखो!
हम से बातें तो रोज करते हो तुम,
कभी हमारी तरफ मुस्कराकर भी देखो!
हमारी नज़र बहुत कुछ कह देती है,
कभी हमें नज़रों से समझ कर तो देखो!
हमसे दोस्ती का रिश्ता है तुम्हारा,
कभी हम से दिल लगा कर तो देखो!
हमारी बातों ने तुम्हारा दिल कहीं बार बहलाया है,
कभी अपनी बातों से हमें हँसा कर तो देखो!
मुझसे मिलकर अंजाने में, दिल में बसने लगती हो,
कभी हमें भी अपने दिल में बसा कर तो देखो!
हर मुश्किल राह भी आसान हो जायेगी बस,
हम पर एक बार ऐतबार कर के तो देखो!
हम तुम्हें जिन्दगी में हर "खुशी" देंगे,
बस एक बार हमें प्यार कर के तो देखो!
तुम्हें पाने के लिये हर इम्तिहान देंगे हम
हमें कभी आजमा कर तो देखो!
तुम कहते हो की बहुत मुश्किल है मुझे अपनाना,
एक बार हमें अपना बना कर तो देखो!!!!!!!!!!
*~*~*~*~*~*~*तेरे नाम*~*~*~*~*~यही तो है

जब भी तुम्हारी याद.......

Monday, March 30, 2009 · 2 comments

~*~*~*~*~*~जानवर~*~*~*~*~*~
ऎ बेवफा जिन्दगी क्यों मुझसे दगा करती हो?
जो भी बना अपना, उसे पराया करती हो,
चाहा जो मुस्कुराना तो आँखे भीगोती हो.
अब यहाँ कोई नहीं, क्यों इन्तजार करवाती हो?
कौन है यहाँ जो सुलझाये उलझी जुल्फ़ें,
क्यों टूटे दिलों को युं जलाती हो?
अगर गम-ए-दर्द का ही समुन्दर हो तो,
क्यों चाहत का मीठा दर्द जगाती हो?
शाम ढले जो पागल दिल सोना चाहे,
क्यों मुझे रुलाने चली आती हो?
जिन्दगी क्यों मुझसे दगा करती हो?????
*~*~*~*~*~*~*तेरे नाम*~*~*~*~*~यही तो है

तुम ही तो थे.........

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~*~*~*~*~*~*~*जानवर*~*~*~*~*~*~*~*
तुम क्या जानों यादों में खो कर आँखें कितना रोती है,
दिल में अपने दर्द समा कर आँखें कितना रोती है,
तुम क्या जानों सावन का मौसम कितनी आग लगाता है,
बारिश कि बुदों को छुकर आँखें कितना रोती है,
अब तो छोटी सी बात पर भी यह दिल भर सा जाता है,
हल्की सी दिल को लगती है ठोकर आँखें कितना रोती है,
अब तो यह जीना भी हम को कोई बोझ सा लगता है,
दिन भर उस बात को याद कर आँखें कितना रोती है,
जख्म-जख्म है आँखें मेरी माज़ी की परछाई से,
अपने अन्दर लहू डूबों कर आँखें कितना रोती है,
तुम एक दुनियाँ नई गये हो तुम को क्या एहसास,
इन राहों में तन्हा सी हो कर आँखें कितना रोती है..
*~*~*~*~*~*~*तेरे नाम*~*~*~*~*~*~*~*यही तो है.