यार को मैंने.....
Thursday, February 5, 2009
by
गोविन्द K. प्रजापत "काका" बानसी
·
1 comments
Labels:
वो तेरा नाम था.....
वो तेरा नाम था.....
***********जानवर************
वो कुछ सुनता तो मैं कहती,
मुझे कुछ और कहना था.
वो पल भर को जो रुक जाता,
मुझे कुछ और कहना था.
कहा उस ने सुनी मेरी, सुनी भी अनसुनी कर दी,
उसे मालुम था इतना,
मुझे कुछ और कहना था.
गलतफहमी ने बातों को युहीं बदल डाला वरना?
कहा कुछ ओर था, वो कुछ ओर समझा.
मुझे कुछ और कहना था.
********तेरे नाम********यही तो है
तेरे नाम……
***********जानवर************
पत्थर बना दिया मुझे रोने नहीं दिया,
दामन भी तेरे गम ने भिगोने नहीं दिया.
तन्हाईयाँ तुम्हारा पता पुछती रही,
रात भर तुम्हारी याद ने सोने नहीं दिया.
आंखों में आकर बैठ गयी आंसुओं की लहर,
पलकों पर कोई ख्वाब, पर रोने नहीं दिया.
दिल को तुम्हारे नाम के आंसू अजीज थे,
दुनियाँ का दर्द दिल में समाने नहीं दिया.
"काका" युहीं उसकी याद चली हाथ थाम कर,
मेले में इस जहां के खोने नहीं दिया..
********तेरे नाम********यही तो है
Subscribe to:
Posts (Atom)

