govindkpraja

Sunday, May 27, 2012 · 0 comments

gfds

हम आज भी तन्हा है!!!!!

Tuesday, November 16, 2010 · 1 comments

***********************************
मुझको तो उनके कदमों में भी जगह नहीं मिली,
और वो है की इस दिल में अपना घर बना गए॥
****************************जानवर*

Accounting Software Tally.ERP9 Services

Sunday, April 18, 2010 · 0 comments

This is a partial list of the services on offer:
• ERP Implementation Services
• Training Services on product usage
• Deployment Services across Locations
• Software Assurance Services - getting regular updates & upgrades
• Data Migration Services - from other products
• Extending the product functionality to suit specific needs
• Customising Syncronisation and data transformation
• Invoice & PO customisation - and other document modifications
• Building specific controls and constraints
• Annual Maintenance Contracts
• On site support - when you need someone to visit your office to fix something

Contact_
Govind K. Prajapat
+91 941 45 57 485
+91 960 25 39 598


सानिया मलिक!!!!!!!?????

Saturday, April 10, 2010 · 1 comments

<<<<<गोविन्द K.>>>>>>

Wednesday, October 7, 2009 · 0 comments

*~*~*जानवर*~*~*~*
चलो फिर ख्वाब देखते है
दिल कि ज़मीन में उम्मीद के
कुछ बीज बोते है
बे मन्ज़िल सफर में
गुबार से अटे चेहरे को धोते है
चलो हम फिर से कोई ख्वाब देखते है
गुलशन-ए-दिल में
नये मौसम उगाते है
किनारों की ख्वाहिश में
भीगे बदन को फिर से सुखाते है
फिर कोयलों की बोली में
कुछ गीत सुहाने लिखते है
कुछ शेर पुराने लिखते है
कुछ नये अफसाने लिखते है
दिल की ख्वाहिश का
फिर से एहतेराम करते है
चलो यह काम करते है
कोइ ख्वाब देखते है
फिर से गीली रेत पर
सपनों के महल बनाते है
उन महलों की छतों पर
फिर कोयलों को सुनते है
बिखरी हुई खाक से
हम फिर मोती मिलन के चुनते है
और बिखरी माला पिरोते है
चलो फिर ख्वाब देखते है
चलो नये ख्वाब देखते है
*~*~*तेरे नाम *~*~*यही तो है~*~*

Tuesday, July 28, 2009 · 0 comments


इस तरह तो किसी को........

· 2 comments


*~*~*~*~*~*~*जानवर*~*~*~*~*~*~*
टुटा हुआ शीशा फिर जोड़ा नहीं जाता
आँख से निकला हुआ आँसू फिर वापस नहीं आता
तुम तो कह कर भुल चुके हो सब कुछ
लेकिन मुझसे वो पल भुलाया नहीं जाता
तेरी मोहब्बत ने जंजीरे डाली है ऐसी
कि छुड़ाना भी चाहुँ तो छुड़ाया नहीं जाता
महफिल में भी मुझ को तन्हाईं नजर आती है
तेरे बिना ये दिल कहीं और लगाया नहीं जाता
मेरे दिल की दीवारों पर सिर्फ़ तेरा ही नाम लिखा है
मिटाना भी चाहुँ तो मिटाया नहीं जाता
सांस रुकने से पहले एक झलक दिखा जाना
बेवफा जिन्दगी का ऐतबार किया नहीं जाता
*~*~*~*~*तेरे नाम *~*~*~*~*यही तो है*~*~*~*


***********************************************
मैं तुझे देख तो सकता हुं, मगर छु नहीं सकता,
तु झील में उतरे हुये मंजर की तरह है॥
************************************* गोविन्द K.

तु जो नहीं..........कुछ भी नहीं

Monday, July 27, 2009 · 1 comments



*~*~*~*~*~*~*जानवर*~*~*~*~*~*~*
अगर गुफ्तगु का आगाज में करता
झिझकती, बिगड़ती मगर मान जाती
जो मैं बढ़ कर उसके कदम रोक लेता
वो पांव पटकती मगर मान जाती
अगर चंद कलियाँ उसे पैश करता
वो दामन झटकती मगर मान जाती
मैं कहता ‘चलों तुम को घुमा कर लाता हुँ’
अकड़ती, झिझकती मगर मान जाती
जो मैं उसको तकता.....ज़मीन को वो तकती
अंगुठा रगड़ती मगर मान जाती
जो पीछे से आँचल का फंदा बनाता
बहुत तिलमिलाती मगर मान जाती
वो गुस्से में जो मुझ नाराज होती
बिखरती, तड़फती मगर मान जाती
जो कहता की ‘ राहों पर चलिये संभलकर’
उछलती, मटकती मगर मान जाती
*~*~*~*~*तेरे नाम *~*~*~*~*यही तो है*~*~*~*
****************************************************
तुझसे तो कोई गिला नहीं है, किस्मत में मेरी सिला नहीं है
"खुशबू" का सौदा हो चुका है ओर फुल अभी खिला नहीं है.
****************************************** गोविन्द K.

हा फिर भी ऐसा ही हो..........

Saturday, July 25, 2009 · 1 comments

*~*~*~*~*~*~*जानवर*~*~*~*~*~*~*
फूल को छुने की खातिर कांटो से जख्मी होते है
जो झोली में आ गिरते थे उन्हें छुने से डर जाते है
जब बारिश बरसा करती थी...हम छतरी में छुप जाते थे
और जलती धुप में नंगे पांव हम छत पर उछला करते थे
जब पास वो होता था तो हम देख उस उसको ना सकते थे
जब दुर चला जाता था वो....हम आहट उसकी सुनते थे
जब सारी दुनियाँ सोती थी हम चाँद से खेला करते थे
जब सारी दुनियाँ उठ जाती हम थक कर सो जाते
हम कितने पागल होते थे.....हम कैसे पागल होते थे
हम आज भी वैसे ही पागल है.......
*~*~*~*~*तेरे नाम *~*~*~*~*यही तो है*~*~*~*


******************************************************
वो मुझसे मेरे इश्क का हिसाब मांग रहा है!!!!!
कितना पागल है........मुझसे मेरे जिन्दा रहने की वजह मांग रहा है......
वो मुझसे मेरी चाहत का सबुत मांग रहा है!!!!
कितना पागल है..........मुझसे मेरे वजुद का ही हिसाब मांग रहा है......
*********************************************** गोविन्द K.

जब भी टुटेगा......

Thursday, July 23, 2009 · 5 comments

*~*~*~*~*~*~*जानवर*~*~*~*~*~*~*
रोना भी जो चाहें तो वो रोने नहीं देता,
वो शख्स तो पलकें भी भिगोने नहीं देता...
वो रोज रुलाता है हमें ख्वाब में आकर,
सोना भी जो चाहें तो वो सोने नहीं देता.....
ये किस के इशारे पर उमड़ आये है बादल,
है कौन जो बारिश कभी होने नहीं देता...
आता है ख्यालों में मेरे कौन ये अक्सर,
जो मुझे किसी ओर का होने नहीं देता....
इस डर से कि कहीं तोड़ कर आँसू ना बहायें,
बच्चों को मैं मिट्टी के खिलोने नहीं देता...
एक शख्स है ऐसा मेरी हस्ती में अभी तक,
जो बोझ अकेले मुझे ढोने नहीं देता...
मैं हुँ कि बहाता हुं तेरी याद में आँसू,
और तु है कि अश्कों को पिरोने नहीं देता....
वो चेहरा अजब है जिसे पाकर मैं अभी तक,
खोना भी जो चाहुँ तो वो खोने नहीं देता...
*~*~*~*~*तेरे नाम *~*~*~*~*यही तो है*~*~*~*

इसीलिये तो........

Tuesday, July 21, 2009 · 2 comments

*~*~*~*~*~*~*जानवर*~*~*~*~*~*~*
जमीन थी मेरी......मगर आसमां उसका का था
इसी लिये मुझे खुद पर........ गुमान उसका था
मैं अब जो धुप में जलता हुं......उसी का है करम
मैं जिसकी छांव में था.......वो पेड़ का था
वो जिसके वास्ते लड़ता रहता था मैं सबसे
मेरे खिलाफ़ ही..............हर एक बयान उसका था
वो जिसने मुझ को हमेशा डाला मुश्किल में
ये पहली बार था..........की इम्तिहान उसका था
तुम मेरी जान हो........ यह भी उसी का कहना था
तुम जख्म-ए-जान हो........यह भी बयान उसका था
जो रोशनी के लिये तरसता था..........शहर भर में
तमाम शहर से..........रोशन मकान उसका था
*~*~*~*~*तेरे नाम *~*~*~*~*यही तो है*~*~*~*

************************************
इससे ज्यादा दु: ख की “काका" और क्या मिसाल दुं,
वो मुझसे लिपट कर रोये किसी ओर के लिये॥
*****************************गोविन्द K.

Wednesday, July 15, 2009 · 3 comments


*~*~*~*~*~*~*जानवर*~*~*~*~*~*~*
जब तेरी याद में यह दिल मचल जाता है
आँख बन्द करता हूं और अश्क निकल जाता है
तेरी तस्वीर को सीने से लगा कर जब मैं
खुब रो लेता हुँ तो दिल बहल जाता है
मेरे जिस हाथ ने थामा था कभी तेरा हाथ
दिल पर वो हाथ रखुं, दिल संभल जाता है
तेरी “खुशबु" की महक है मेरे घर में अब तक
कोई गम भी यहां आ जाये तो टल जाता है
कितना बेबस है वो इंसान जिसे मोहब्ब्त में
प्यार मिलता नहीं और वक्त बदल जाता है
वक्त-ए-रुखसत मेरी आंखों ने किया था जो सवाल
अब दुआ बन कर मेरे अश्क में ढल जाता है
आज जलता है यह सीना तो इसे जल जाने दो
चांद देखे बिना सुरज भी तो ढल जाता है
इश्क करना बहुत आसान था लेकिन अब दिल
इश्क का नाम भी सुन ले तो दहल जाता है
शायर मैं था तो नहीं पर तुम्हारी चाहत में
अब तो हर अश्क से एक शैर निकल जाता है
आखिरी वक्त में जब लौट के आये वो
आंख हंसती रही और दम निकल जाता है
*~*~*~*~*तेरे नाम *~*~*~*~*यही तो है*~*~*~*

तुम्हें मैं याद आती हुँ?

Wednesday, July 1, 2009 · 4 comments

*~*~*~*जानवर*~*~*~*
अजब पागल सी लड़की है,
मुझे हर खत में लिखती है
“मुझे तुम याद करते हो?
तुम्हें मैं याद आती हूँ?"

मेरी बातें सताती है,
मेरी नींदें जगाती है,
मेरी आँखे रुलाती है,
दिसम्बर की सुनहरी धूप में अब भी टहलते हो?
किसी खामोश रास्ते से
कोई आवाज आती है?
थरथराती सर्द रातों में
तुम अब भी छत पर जाते हो?
फलक के सब सितारों को
मेरी बातें सुनाते हो?
किताबों से तुम्हारे इश्क में कोई कमी आई?
या मेरी याद की वजह से आँखों में नमी है?
अजब पागल सी लड़की है,
मुझे हर खत में लिखती.
जवाब उस को लिखता हुँ..
मेरी व्यस्तता देखो सुबह से शाम ऑफिस में रहता हुँ
फिर उस के बाद दुनियाँ की,
कई मजबूरीयाँ पांव में बेड़ी डाले रखती है,
मुझे खाली समय, चाहत से भरे सपने नहीं दिखते,
टहलने, जागने, रोने की मोहलत ही नहीं मिलती.
सितारों से मिले अरसा हुआ..नाराज हो शायद!!!!
किताबों से मेरा प्यार अभी वैसा ही है...
फर्क इतना पड़ा है, अब उन्हें अरसे में पढ़ता हुँ.
तुम्हें किसने कहा पगली की “मैं तुम्हें याद करता हुँ!"
मैं तो खुद को भुलने की कोशिश में लगा रहता हुँ!
तुम्हें ना याद आने की कोशिश में लगा रहता हुँ!
मगर यह कोशिश मेरी बहुत नाकाम रहती है.
मेरे दिन-रात में अब भी तुम्हारी शाम रहती है,
मेरे लफ्जों कि हर माला “तेरे नाम" रहती है.
तुम्हें किसने कहा पगली की “मैं तुम्हें याद करता हुँ!"
पुरानी बात है जो लोग अक्सर गुनगुनाते है,
‘हम याद उन्हें करते है, जिन्हें हम भुल जाते है’
अजब पागल सी लड़की हो,
मेरी व्यस्तता देखो
तुम्हें दिल से भुलाऊं!, तुम्हारी याद ना आये!
तुम्हें दिल से भुलाने की मुझे फुरसत नहीं मिलती,
और इस व्यस्त जीवन में
तुम्हारे खत का एक जुमला
“तुम्हें मैं याद आती हुँ?"
मेरी चाहत कि शिद्दत में कमी होने नहीं देता,
बहुत रातें जागता है, मुझे सोने नहीं देता,
इसलिये अगली बार अपने खत में यह मत लिखना.
अजब पागल सी लड़की है, मुझे फिर भी यह लिखती है.....
मुझे तुम याद करते हो, तुम्हें मैं याद आती हुँ.
*~*~*~*तेर नाम *~*~*~*यही तो है*~*~*~*

अगर तुम...एक बार....

Tuesday, June 30, 2009 · 5 comments

*~*~*~*~*~*~*जानवर*~*~*~*~*~*~*
मेरी जिन्दगी का तसव्वुर मेरे हाथ की लकीरे,
इन्हें काश तुम बदलते तो कुछ और बात होती.
ये खुले-खुले से गेसू, इन्हें लाख तुम संवारो,
मेरे हाथ से संवरते तो कुछ और बात होती.
मैं तेरा आईना था, मैं तेरा आईना हुँ,
मेरे सामने संवरते तो कुछ और बात होती.
अभी आँख ही लड़ी थी, कि गिरा दियआ नज़रों से,
ये जो सिलसीला बढ़ाते, तो कुछ और बात होती.
"काका" अपनी जिन्दगी का तो कुछ गम ही नहीं है,
तेरे दरवाजे पर मरते, तो कुछ और बात होती.
*~*~*~*~*तेरे नाम *~*~*~*~*यही तो है*~*~*~*


>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>
आदत नहीं है मुँह ढँक कर सोने की मुझको,
मुझ पर क्या गुजरेगी!!! जब कब्र में सोना होगा..
>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>गोविन्द K. >>>


तुम्हारे बिना ये भी तो...........

Monday, May 18, 2009 · 0 comments

*~*~*~*~*~*~* जानवर *~*~*~*~*~*~*
दिल जलेगा तो जमाने में उजाला होगा,
हुस्न जर्रों का सितारों से निराला होगा.

कौन जाने ये मुहब्बत कि सज़ा है की सिला,
हम “साहिल" पर पहुँचे तो किनारा ना मिला.
बुझ गया चाँद किसी दर्द भरे दिल की तरह,
रात का रंग अभी और भी काला होगा,
देखना रोयेगी, फरयाद करेगी दुनियाँ,
हम ना होंगे तो हमें याद करेगी दुनियाँ,
अपने जीने की अदा भी अनोखी सब से,
अपने मरने का अन्दाज भी निराला होगा...!
*~*~*~* तेरे नाम*~*~*~*~* यही तो है *~*~*

कोई तो बात है......

· 3 comments

*~*~*~*~*~*~* जानवर *~*~*~*~*~*~*
गमों की जमीन पर कोई “खुशी" का मचान नहीं है,
क्या हुं? कौन हुं मैं? मुझे अपनी पहचान नहीं है,
काश!!! उड़ पाता कहीं ऊँचे अपने यह पँख फ़ैला कर,
अफ़सोस!!! मेरे मुकद्दर में कहीं आसमां नहीं है,

भीड़ में रह कर भी रहा हुँ सदा तन्हा मैं,
मेरे लिये किसी भी राह में कोई कारवाँ नहीं है,
गम छुपाने की हर अदा मालुम है मुझको,
देखो मेरी हँसी में कोई भी गम का निशां नहीं है,
अब तो हर सुबह गुजरेगी ऐसे ही आपस में गले मिल कर,
अब तो कोई भी मेरे और गम के दरमियां नहीं है,
इस दुनियाँ में सभी जीते है, कुछ आरजू ले कर,
अपना दिल है पत्थर का इसका कोई अरमां नहीं है..
*~*~*~*~*~*~* तेरे नाम*~*~*~*~* यही तो है *~*~*

ये सोचना की मैं.......

Wednesday, May 13, 2009 · 1 comments

*~*~*~*~*~*~*~*~जानवर*~*~*~*~*~*~*~*~*~*
कहीं चांद रातों में खो गया, कहीं चांदनी भी भटक गई,
मैं चराग, वो भी बुझा हुआ, मेरी रात कैसे चमक गई?
मेरी दास्तान को आरजु थी, तेरी नरम पलकों की छांव में,

मेरे साथ था तुझे जागना, तेरी आँख कैसे झपक गई?
भला हम मिले भी तो क्या मिले! वही दुरियाँ, वही फासले,
ना कभी हमारे कदम बढ़े, ना कभी तुम्हारी झिझक गई.
तेरे हाथ से मेरे होंठों तक वही इंतजार की प्यास है,
मेरे नाम की जो शराब थी, कहीं रास्ते में छलक गई.
तुझे भुल जाने की कोशिशें कभी कामयाब ना हो सकी,
तेरी याद शाख-ए-गुलाब है जो हवा चली तो लचक गई.
*~*~*~*~*~*~*~*~तेरे नाम*~*~*~*~*~*~*~*~ यही तो है

कैसे भी हो.....

Tuesday, May 12, 2009 · 2 comments

*~*~*~*~*~*जानवर~*~*~*~*~*
बहारों में पतझड़ के साये है,
नजारों पर अन्धेरे से छाये है,
फुलों के दामन में कांटे है,
बागों में फैले सन्नाटे है,
कोयल की कूक अनजानी है,
हंसी की आँखों में पानी है,
खुशनुमा झोंकों में महक नहीं,
आसमां में पंछियों की चहक नहीं,
ख्यालों की कोई जंजीरे नहीं,
ख्वाबों सी कोई तकदीरें नही,
दिल की धड़कनों में सिर्फ़ आहें है,
गलत मन्जिलों पर जाती हुई राहें है,
नाकामयाब सी कई कोशिशे है,
भोलेपन में छुपी साजिशे है,
हम इस छल भरी दुनियाँ में,
जाये तो जाये कहाँ???????
*~*~*~*तेरे नाम*~*~*~*~*यही तो
है

कभी तो........

Monday, April 27, 2009 · 1 comments



*~*~*~*~*~जानवर~*~*~*~*~*
रात में ख्यालों में आती हो तुम,
कभी सामने आकर भी देखो!
हम से बातें तो रोज करते हो तुम,
कभी हमारी तरफ मुस्कराकर भी देखो!
हमारी नज़र बहुत कुछ कह देती है,
कभी हमें नज़रों से समझ कर तो देखो!
हमसे दोस्ती का रिश्ता है तुम्हारा,
कभी हम से दिल लगा कर तो देखो!
हमारी बातों ने तुम्हारा दिल कहीं बार बहलाया है,
कभी अपनी बातों से हमें हँसा कर तो देखो!
मुझसे मिलकर अंजाने में, दिल में बसने लगती हो,
कभी हमें भी अपने दिल में बसा कर तो देखो!
हर मुश्किल राह भी आसान हो जायेगी बस,
हम पर एक बार ऐतबार कर के तो देखो!
हम तुम्हें जिन्दगी में हर "खुशी" देंगे,
बस एक बार हमें प्यार कर के तो देखो!
तुम्हें पाने के लिये हर इम्तिहान देंगे हम
हमें कभी आजमा कर तो देखो!
तुम कहते हो की बहुत मुश्किल है मुझे अपनाना,
एक बार हमें अपना बना कर तो देखो!!!!!!!!!!
*~*~*~*~*~*~*तेरे नाम*~*~*~*~*~यही तो है

जब भी तुम्हारी याद.......

Monday, March 30, 2009 · 2 comments

~*~*~*~*~*~जानवर~*~*~*~*~*~
ऎ बेवफा जिन्दगी क्यों मुझसे दगा करती हो?
जो भी बना अपना, उसे पराया करती हो,
चाहा जो मुस्कुराना तो आँखे भीगोती हो.
अब यहाँ कोई नहीं, क्यों इन्तजार करवाती हो?
कौन है यहाँ जो सुलझाये उलझी जुल्फ़ें,
क्यों टूटे दिलों को युं जलाती हो?
अगर गम-ए-दर्द का ही समुन्दर हो तो,
क्यों चाहत का मीठा दर्द जगाती हो?
शाम ढले जो पागल दिल सोना चाहे,
क्यों मुझे रुलाने चली आती हो?
जिन्दगी क्यों मुझसे दगा करती हो?????
*~*~*~*~*~*~*तेरे नाम*~*~*~*~*~यही तो है