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हम आज भी तन्हा है!!!!!
Accounting Software Tally.ERP9 Services
This is a partial list of the services on offer:
• ERP Implementation Services
• Training Services on product usage
• Deployment Services across Locations
• Software Assurance Services - getting regular updates & upgrades
• Data Migration Services - from other products
• Extending the product functionality to suit specific needs
• Customising Syncronisation and data transformation
• Invoice & PO customisation - and other document modifications
• Building specific controls and constraints
• Annual Maintenance Contracts
• On site support - when you need someone to visit your office to fix something
Contact_
Govind K. Prajapat
+91 941 45 57 485
+91 960 25 39 598
तु जो नहीं..........कुछ भी नहीं
तुझसे तो कोई गिला नहीं है, किस्मत में मेरी सिला नहीं है
"खुशबू" का सौदा हो चुका है ओर फुल अभी खिला नहीं है.
****************************************** गोविन्द K.
हा फिर भी ऐसा ही हो..........
*~*~*~*~*~*~*जानवर*~*~*~*~*~*~*
फूल को छुने की खातिर कांटो से जख्मी होते है
जो झोली में आ गिरते थे उन्हें छुने से डर जाते है
जब बारिश बरसा करती थी...हम छतरी में छुप जाते थे
और जलती धुप में नंगे पांव हम छत पर उछला करते थे
जब पास वो होता था तो हम देख उस उसको ना सकते थे
जब दुर चला जाता था वो....हम आहट उसकी सुनते थे
जब सारी दुनियाँ सोती थी हम चाँद से खेला करते थे
जब सारी दुनियाँ उठ जाती हम थक कर सो जाते
हम कितने पागल होते थे.....हम कैसे पागल होते थे
हम आज भी वैसे ही पागल है.......
*~*~*~*~*तेरे नाम *~*~*~*~*यही तो है*~*~*~*
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वो मुझसे मेरे इश्क का हिसाब मांग रहा है!!!!!
कितना पागल है........मुझसे मेरे जिन्दा रहने की वजह मांग रहा है......
वो मुझसे मेरी चाहत का सबुत मांग रहा है!!!!
कितना पागल है..........मुझसे मेरे वजुद का ही हिसाब मांग रहा है......
*********************************************** गोविन्द K.
इसीलिये तो........
तुम्हें मैं याद आती हुँ?
अगर तुम...एक बार....
*~*~*~*~*~*~*जानवर*~*~*~*~*~*~*
मेरी जिन्दगी का तसव्वुर मेरे हाथ की लकीरे,
इन्हें काश तुम बदलते तो कुछ और बात होती.
ये खुले-खुले से गेसू, इन्हें लाख तुम संवारो,
मेरे हाथ से संवरते तो कुछ और बात होती.
मैं तेरा आईना था, मैं तेरा आईना हुँ,
मेरे सामने संवरते तो कुछ और बात होती.
अभी आँख ही लड़ी थी, कि गिरा दियआ नज़रों से,
ये जो सिलसीला बढ़ाते, तो कुछ और बात होती.
"काका" अपनी जिन्दगी का तो कुछ गम ही नहीं है,
तेरे दरवाजे पर मरते, तो कुछ और बात होती.
*~*~*~*~*तेरे नाम *~*~*~*~*यही तो है*~*~*~*
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आदत नहीं है मुँह ढँक कर सोने की मुझको,
मुझ पर क्या गुजरेगी!!! जब कब्र में सोना होगा..
>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>गोविन्द K. >>>






